प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : एक तरफ सरकार विकास, पर्यावरण संतुलन और किसानों के हितों की बड़ी-बड़ी बातें करती है, वहीं दूसरी तरफ ज़मीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। नागाळा (सी.) गांव के नागरिकों ने अब प्रशासन के खिलाफ खुला मोर्चा खोलते हुए कोल डिपो बंद करने की मांग को लेकर तीखा निवेदन जिलाधिकारी कार्यालय में सौंपा है। इस पूरे मामले ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं।
ग्रामीणों का आरोप है कि गांव के समीप संचालित कोल डिपो के कारण भारी प्रदूषण फैल रहा है, जिससे नागरिकों के स्वास्थ्य पर विपरीत असर पड़ रहा है। इतना ही नहीं, किसानों के खेतों तक जाने वाले रास्ते भी कथित रूप से बंद किए जा रहे हैं, जिससे खेती-किसानी पर सीधा संकट खड़ा हो गया है। सवाल यह उठ रहा है कि आखिर वर्षों से शिकायतों के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की?
निवेदन में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोल डिपो के संबंध में कई बार प्रशासन को अवगत कराया गया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता अब किसानों और आम जनता के लिए परेशानी का कारण बन चुकी है। लोगों का आरोप है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो गांव का जीवन दूभर हो जाएगा।
सबसे गंभीर बात यह है कि निवेदन में ग्रामीणों ने आंदोलन की चेतावनी भी दी है। नागरिकों ने स्पष्ट किया है कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई नहीं हुई तो वे सड़क पर उतरकर रास्ता रोको आंदोलन करेंगे। आंदोलन के दौरान उत्पन्न होने वाली किसी भी स्थिति के लिए प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया गया है।
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या प्रशासन केवल कागजों तक सीमित रहेगा या फिर आम जनता की समस्याओं को गंभीरता से लेकर कार्रवाई करेगा? क्या प्रदूषण फैलाने वाले ऐसे मामलों में राजनीतिक संरक्षण काम कर रहा है? और आखिर किसानों को अपने ही खेतों तक पहुंचने के लिए आंदोलन की चेतावनी क्यों देनी पड़ रही है?
फिलहाल नागाळा गांव में लोगों के बीच भारी नाराज़गी देखी जा रही है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक रूप से और गर्म होने की संभावना जताई जा रही है।




