प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस नगर परिषद द्वारा वर्षों से विभिन्न डायवर्टेड ले-आउट्स को अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) दिए जाने के बावजूद आज तक यह जांच नहीं की गई कि संबंधित ले-आउट्स का विकास मंजूर विकास आराखड़े, नियमानुसार शर्तों और सरकारी नियमावली के अनुसार वास्तव में हुआ भी है या नहीं। इस पूरे मामले ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली, निर्माण विभाग की जवाबदेही और विकास कार्यों की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जानकारी के अनुसार, कई ले-आउट्स को NOC जारी करते समय विकासकों पर अनेक तकनीकी और कानूनी शर्तें लागू की गई थीं। इनमें DP रोड के लिए आवश्यक जमीन छोड़ना, सार्वजनिक उपयोग हेतु खुली जगह उपलब्ध कराना, नालियां, स्ट्रीट लाइट, सड़कें, उद्यान और अन्य मूलभूत सुविधाएं विकसित करना अनिवार्य था। लेकिन आज तक किसी सक्षम विभाग द्वारा यह भौतिक जांच नहीं की गई कि इन शर्तों का पालन वास्तव में हुआ भी है या केवल कागजों में विकास दिखाकर फाइलें बंद कर दी गईं।
सबसे गंभीर सवाल उन ले-आउट्स को लेकर उठ रहे हैं, जहां मंजूर विकास आराखड़े (DP Plan) के अनुसार प्रस्तावित सड़कों की जमीन पर कथित रूप से अतिक्रमण होने की चर्चाएं हैं। यदि सड़क के लिए आरक्षित भूमि पर निर्माण या कब्जा हुआ है, तो यह सीधे-सीधे शहर के भविष्य के नियोजन के साथ खिलवाड़ माना जाएगा।
इसी प्रकार कई स्थानों पर सार्वजनिक उपयोग के लिए आरक्षित Open Space का वास्तविक अस्तित्व भी संदेह के घेरे में बताया जा रहा है। स्थानीय नागरिकों के अनुसार, कुछ जगहों पर खुली जगहों का अन्य उपयोग किए जाने या अनधिकृत प्लॉटिंग होने की भी आशंका है। यदि यह सत्य पाया जाता है, तो यह नगर नियोजन नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाएगा।
सवाल यह भी उठ रहा है कि जिन ले-आउट्स के लिए सांडपानी प्रक्रिया प्रकल्प (STP) अनिवार्य था, क्या वे प्रकल्प वास्तव में शुरू किए गए हैं या केवल मंजूरी प्राप्त करने तक ही सीमित रहे? पर्यावरणीय नियमों की अनदेखी भविष्य में नागरिकों के लिए बड़ी समस्या बन सकती है।
इसके अलावा विकास शुल्क (Development Charges), कर और अन्य शासकीय शुल्कों की संपूर्ण वसूली हुई या नहीं, इस पर भी संशय व्यक्त किया जा रहा है। यदि बिना संपूर्ण शुल्क वसूली के NOC प्रदान किए गए हैं, तो यह सीधे-सीधे राजस्व नुकसान का विषय बन सकता है।
शहर में अब यह मांग जोर पकड़ रही है कि नगर परिषद के निर्माण, कर और जलापूर्ति विभाग के संयुक्त पथक द्वारा सभी डायवर्टेड ले-आउट्स की व्यापक भौतिक जांच कराई जाए और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित विकासकों तथा जिम्मेदार अधिकारियों पर नियमानुसार कड़ी कार्रवाई की जाए।
सूत्रों के अनुसार, यदि इस मामले की निष्पक्ष जांच होती है तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं। घुग्घुस शहर में विकास के नाम पर केवल कागजी खानापूर्ति हुई या वास्तव में नागरिक सुविधाओं का निर्माण किया गया, यह आने वाले समय में जांच का सबसे बड़ा विषय बनने वाला है।




