(प्रणयकुमार बंडी)
घुग्घुस (चंद्रपुर) : भारत की आध्यात्मिक परंपरा में कार्तिक पूर्णिमा का दिवस अत्यंत पवित्र और शुभ माना गया है। यह तिथि न केवल धार्मिक दृष्टि से विशेष है, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक एकता का प्रतीक भी मानी जाती है। इस वर्ष यह पूर्णिमा और सिख धर्म के संस्थापक गुरु नानक देव जी की जयंती एक ही दिन पड़ने से इसका महत्त्व और भी बढ़ गया है।
कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्त्व
हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास की पूर्णिमा को देव दीपावली के रूप में भी मनाया जाता है। यह दिन भगवान विष्णु के मत्स्य अवतार से जुड़ा है और इसे स्नान, दान व दीपदान का पर्व कहा गया है। मान्यता है कि इस दिन गंगा, गोदावरी या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से जन्म-जन्मांतर के पापों का क्षय होता है।
घुग्घुस, वडा, पांडरकवड़ा और आसपास के क्षेत्रों में भी श्रद्धालु इस दिन प्रातःकाल स्नान-दान करते हैं और मंदिरों में दीप जलाकर भगवान के चरणों में अपनी भक्ति अर्पित करते हैं।
देव दीपावली का उत्सव
वाराणसी की भांति चंद्रपुर और विदर्भ के अनेक हिस्सों में भी इस दिन दीपोत्सव का सुंदर आयोजन किया जाता है। घुग्घुस, वडा, पांडरकवड़ा के शिव मंदिर, हनुमान मंदिर, गुरुद्वारा परिसर और स्थानीय घाटों पर श्रद्धालु दीप प्रज्ज्वलित करते हैं। संध्या समय पूरा नगर दीपमालाओं से झिलमिला उठता है, मानो धरती पर आकाश उतर आया हो।
सिख परंपरा में गुरुनानक जयंती का महत्त्व
कार्तिक पूर्णिमा का दिन गुरु नानक देव जी महाराज की जयंती के रूप में भी मनाया जाता है। उनका जन्म 15 अप्रैल 1469 को तलवंडी (अब पाकिस्तान के ननकाना साहिब) में हुआ था, लेकिन पारंपरिक रूप से उनका जन्मोत्सव कार्तिक पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।
गुरु नानक देव जी ने “एक ओंकार” के संदेश के साथ संसार को समानता, सेवा और सत्य के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। उन्होंने जाति, धर्म और भेदभाव से परे एक ऐसे समाज की स्थापना का आह्वान किया जिसमें हर व्यक्ति एक-दूसरे के प्रति प्रेम और करुणा रखे।
घुग्घुस में श्रद्धा और सौहार्द का वातावरण
घुग्घुस स्थित गुरुद्वारा साहिब में इस अवसर पर विशेष दीवान सजाया जाता है। सुबह से ही निशान साहिब का झंडा वंदन, कीर्तन दरबार, पाठ साहिब और लंगर सेवा का आयोजन होता है। सिख समाज के अलावा अन्य धर्मों के लोग भी बड़ी संख्या में श्रद्धा से गुरुद्वारे पहुंचते हैं। यह दृश्य धार्मिक एकता और आपसी प्रेम का जीवंत उदाहरण प्रस्तुत करता है।
पर्व का संदेश
कार्तिक पूर्णिमा और गुरुनानक जयंती — दोनों ही पर्व हमें आत्मिक प्रकाश और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देते हैं। जहां कार्तिक पूर्णिमा हमें अंधकार मिटाकर ज्ञान का दीप जलाने की सीख देती है, वहीं गुरु नानक देव जी का संदेश हमें समानता, सेवा और सत्य की राह पर चलने को प्रेरित करता है।
इस पावन अवसर पर घुग्घुस में भक्ति, दीपों की रौशनी और आपसी भाईचारे का अनोखा संगम देखने को मिलता है — जो यह बताता है कि विविधता में ही भारत की वास्तविक एकता छिपी है।




