गांवठाण की जमीन पर NA आदेश, भूखंड विभाजन और लेआउट की मंजूरी को लेकर उठे सवाल; जिलाधिकारी से लेकर तहसीलदार तक के रुख पर रहेगी नजर
प्रणयकुमार बंडी
वणी, यवतमाल: यवतमाल जिले की वणी तहसील के शिवनी और चिंचोली गांवों में गांवठाण क्षेत्र के भीतर निजी जमीन को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर बेचे जाने के मामले में भूमि उपयोग, भूखंडों के न्यूनतम क्षेत्रफल और आवश्यक अनुमतियों को लेकर सवाल उठ रहे हैं। विशेष रूप से 10×10 फीट और 10×12 फीट आकार के भूखंडों की बिक्री तथा उनके कानूनी दर्जे की जांच की मांग महत्वपूर्ण हो गई है।
इस मामले में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जिलाधिकारी, यवतमाल, तहसीलदार, वणी और संबंधित ग्राम पंचायतें जमीन के वास्तविक दर्जे तथा लागू नियमों की जांच कर क्या कदम उठाती हैं।

सामान्य भूखंडों के लिए न्यूनतम क्षेत्रफल का सवाल
महाराष्ट्र की एकीकृत विकास नियंत्रण एवं प्रोत्साहन नियमावली (UDCPR-2020) में सामान्य भूखंडों तथा विशेष आवास योजनाओं के लिए अलग-अलग प्रावधान हैं। सामान्य आवासीय या व्यावसायिक भूखंडों के लिए 30 वर्गमीटर का मानक और कुछ निर्दिष्ट विशेष आवास योजनाओं के लिए 20 वर्गमीटर का मानक बताया जाता है। हालांकि, किसी विशेष जमीन पर कौन-सा नियम लागू होगा, यह उसके स्थान, उपयोग और संबंधित योजना की शर्तों पर निर्भर करता है।
इस संदर्भ में 10×10 फीट का भूखंड लगभग 9.29 वर्गमीटर और 10×12 फीट का भूखंड लगभग 11.15 वर्गमीटर होता है। दोनों का क्षेत्रफल सामान्य 30 वर्गमीटर के मानक से कम है। विशेष योजनाओं के लिए बताए गए 20 वर्गमीटर के मानक से भी ये छोटे हैं।
लेकिन अब सवाल चर्चा में है कि शिवनी और चिंचोली के प्रत्येक भूखंड अवैध है या वैध यह जांचना आवश्यक है कि संबंधित जमीन आधिकारिक गांवठाण सीमा के भीतर है या नहीं, उस पर कौन-से विकास नियंत्रण नियम लागू होते हैं और भूखंडों का विभाजन किसी स्वीकृत योजना के अंतर्गत किया गया है या नहीं।

NA आदेश नहीं होने पर भी स्थिति की जांच जरूरी
गांवठाण की जमीन के मामले में NA यानी गैर-कृषि उपयोग की अनुमति का प्रश्न जमीन के वास्तविक राजस्व दर्जे और लागू कानूनी प्रावधानों के अनुसार तय होता है।
हालांकि, यदि जमीन को छोटे भूखंडों में बांटकर बेचा गया है, तो संबंधित भूखंड-विभाजन, लेआउट की मंजूरी, निर्माण की अनुमति और अन्य लागू शर्तों की जांच आवश्यक हो सकती है।
प्रशासन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि संबंधित जमीन का रिकॉर्ड क्या है, भूखंडों का विभाजन किस नियम के तहत किया गया और आवश्यक अनुमतियां प्राप्त की गई हैं या नहीं।
ज्ञापन और निवेदन पर प्रशासन का क्या होगा रुख?
शिवनी और चिंचोली में जमीन के भूखंडों की बिक्री को लेकर प्रशासन के समक्ष सवाल उठने पर अब जिलाधिकारी, यवतमाल, तहसीलदार, वणी तथा संबंधित ग्राम पंचायतों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यदि इस विषय में ज्ञापन, निवेदन या शिकायत प्रस्तुत की जाती है, तो संबंधित अधिकारियों से अपेक्षा होगी कि वे शिकायत में उल्लिखित तथ्यों की निष्पक्ष जांच करें और लागू नियमों के आधार पर लिखित जवाब दें।
जांच के दौरान गांवठाण की प्रमाणित सीमा, जमीन का 7/12 उतारा अथवा प्रॉपर्टी कार्ड, स्वामित्व संबंधी दस्तावेज, भूखंडों का नक्शा और उपलब्ध लेआउट मंजूरी जैसे रिकॉर्डों का परीक्षण किया जाना चाहिए।
साथ ही यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि संबंधित भूखंडों पर मकान बनाने की अनुमति मिल सकती है या नहीं और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है, तो उसके लिए कौन-सा कानूनी प्रावधान लागू होगा।

साठगांठ की आशंका पर भी तथ्यों के आधार पर जांच जरूरी
जमीन की खरीद-बिक्री और भूखंड-विभाजन से जुड़े मामलों में प्रशासनिक पारदर्शिता अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि किसी शिकायत में अधिकारियों या अन्य व्यक्तियों की मिलीभगत की आशंका जताई जाती है, तो उसका परीक्षण दस्तावेजों और प्रमाणों के आधार पर किया जाना चाहिए।
बिना प्रमाण किसी व्यक्ति या अधिकारी को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन यदि शिकायतों पर कार्रवाई नहीं होती या नियमों के संबंध में स्पष्ट जवाब नहीं दिया जाता, तो प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
अब सबकी नजर प्रशासनिक कार्रवाई पर
शिवनी और चिंचोली में 10×10 तथा 10×12 फीट के भूखंडों की बिक्री का मामला जमीन के कानूनी दर्जे, न्यूनतम क्षेत्रफल, भूखंड-विभाजन और निर्माण अनुमति से जुड़े सवालों की निष्पक्ष जांच की मांग करता है।
अब देखना होगा कि जिलाधिकारी, यवतमाल, तहसीलदार, वणी और संबंधित अधिकारी उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच कर स्पष्ट निर्णय देते हैं या नहीं। क्या संबंधित जमीनों की स्थिति और लागू नियमों को लेकर लिखित जवाब सामने आएगा? क्या आवश्यक होने पर जांच और कानूनी कार्रवाई की जाएगी? इन सवालों के जवाब प्रशासनिक प्रक्रिया से ही स्पष्ट होंगे।




