परिसर में उगी झाड़ियां, कचरे का ढेर और मवेशियों की आवाजाही से बिगड़े हालात; जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर मीणा मोरपाका ने उठाए सवाल
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस, चंद्रपुर: घुग्घूस नगर परिषद के अंतर्गत आने वाले प्रभाग क्रमांक 10 की एक आंगनवाड़ी के परिसर की कथित बदहाल स्थिति ने छोटे बच्चों की सुरक्षा और नगर परिषद की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो से तीन वर्ष की उम्र के नन्हे बच्चों के लिए संचालित आंगनवाड़ी का परिसर झाड़ियों, कचरे और मवेशियों की आवाजाही से घिरा होने की बात सामने आई है। आरोप है कि परिसर में असामाजिक तत्वों और नशेड़ियों का जमावड़ा भी लगा रहता है, जिससे बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

आंगनवाड़ी परिसर में झाड़ियों का साम्राज्य
आंगनवाड़ी परिसर में छोटी-छोटी झाड़ियां और घनी घास उगने से स्थिति ऐसी बन गई है कि कुछ स्थानों पर बच्चों का दिखाई देना भी मुश्किल हो सकता है। परिसर में जगह-जगह कचरा दिखाई देने और गायों के घूमने की शिकायत भी सामने आई है। छोटे बच्चों के खेलने, बैठने और सुरक्षित वातावरण में समय बिताने के लिए बनाए गए परिसर की ऐसी स्थिति स्वच्छता और रखरखाव व्यवस्था पर सवाल उठाती है।
आंगनवाड़ी में आने वाले बच्चे बेहद कम उम्र के होते हैं। ऐसे में परिसर की नियमित सफाई, झाड़ियों की कटाई, कचरे का निपटारा और सुरक्षित प्रवेश व्यवस्था सुनिश्चित करना बेहद जरूरी है। यदि परिसर में नशेड़ियों की आवाजाही की शिकायत सही है, तो यह मामला और भी गंभीर हो जाता है।
बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी?
प्रभाग क्रमांक 10 के नगरसेवक, नगरसेविका और स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने क्षेत्र की बुनियादी सुविधाओं, स्वच्छता और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर सक्रियता दिखाएं। ऐसे में आंगनवाड़ी परिसर की कथित बदहाली लंबे समय से बनी हुई है या नहीं, इसकी जांच और जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करना जरूरी है।

सोशल मीडिया पर सक्रियता, जमीन पर व्यवस्था कहां?
आजकल सोशल मीडिया पर वीडियो बनाकर समस्याओं को वायरल करना कई नेताओं और जनप्रतिनिधियों के लिए प्रचार का माध्यम बनता दिखाई देता है। लेकिन असली कसौटी सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली सक्रियता नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर समस्याओं का समाधान है। प्रभाग क्रमांक 10 की आंगनवाड़ी की स्थिति ने इसी अंतर पर सवाल खड़ा किया है। बच्चों के सुरक्षित भविष्य की बात करने वाले जनप्रतिनिधियों को पहले अपने क्षेत्र की बुनियादी व्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए।
मीणा मोरपाका ने जनप्रतिनिधियों पर साधा निशाना
घुग्घूस नगर परिषद की गठनेता मीणा मोरपाका ने प्रभाग क्रमांक 10 के जनप्रतिनिधियों की कार्यप्रणाली पर तीखी आलोचना करते हुए छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि दो से तीन वर्ष की उम्र के बच्चों से जुड़ी आंगनवाड़ी जैसी महत्वपूर्ण जगह की स्थिति को नजरअंदाज करना गंभीर विषय है। बच्चों को स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना प्राथमिकता होनी चाहिए।

नगर परिषद से तत्काल कार्रवाई की अपेक्षा
अब सवाल यह है कि नगर परिषद प्रशासन इस परिसर की सफाई, झाड़ियों की कटाई, कचरे के निपटारे और मवेशियों की आवाजाही रोकने के लिए कब ठोस कदम उठाएगा? साथ ही, परिसर में कथित रूप से नशेड़ियों के जमावड़े की शिकायत की जांच कर बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी?
मासूम बच्चों की सुरक्षा कोई राजनीतिक प्रचार का विषय नहीं, बल्कि प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की बुनियादी जिम्मेदारी है। जरूरत है कि संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण करें, परिसर को स्वच्छ और सुरक्षित बनाएं तथा लापरवाही पाए जाने पर जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करें। अब देखना यह है कि प्रभाग क्रमांक 10 की इस आंगनवाड़ी की तस्वीर वास्तव में बदलती है या बच्चों की सुरक्षा से जुड़ा यह सवाल यूं ही अनुत्तरित रहता है।




