Wednesday, June 3, 2026

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विकास की नींव या हरियाली पर वार?

घुग्घुस नगर परिषद परिसर में खड़े पीपल के पेड़ का भविष्य अधर में, प्रशासन की चुप्पी पर उठे सवाल

प्रणयकुमार बंडी

घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस नगर परिषद कार्यालय परिसर में पुराने ग्राम पंचायत काल के कवेलू भवन को हटाकर नए सभागृह के निर्माण कार्य की शुरुआत की गई है। वर्तमान में निर्माण कार्य प्रगति पर है और ग्राउंड वर्क जारी है। लेकिन इस विकास कार्य के बीच एक ऐसा मुद्दा सामने आया है जिसने पर्यावरण प्रेमियों और नागरिकों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।

निर्माण स्थल के बीचों-बीच लगभग 20 से 25 फीट ऊंचा पीपल का पेड़ आज भी मजबूती से खड़ा है। भीषण गर्मी के दौर में यह पेड़ न केवल छाया प्रदान कर रहा है, बल्कि पर्यावरण संतुलन और स्वच्छ हवा का भी महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है। ऐसे में इस पेड़ का भविष्य अब शहर में चर्चा का विषय बन गया है।

स्थानीय नागरिकों के अनुसार नगर परिषद परिसर में पहले दो बड़े पीपल के पेड़ मौजूद थे। इनमें से एक पेड़ को कथित रूप से पहले ही काट दिया गया है। अब लोगों की निगाहें दूसरे पीपल के पेड़ पर टिकी हुई हैं। सवाल यह है कि क्या प्रशासन इस पेड़ को वैज्ञानिक तरीके से रेस्क्यू कर किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करेगा, या फिर विकास कार्य के नाम पर इसे भी काट दिया जाएगा?

पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षों पुराने पीपल जैसे वृक्ष केवल पेड़ नहीं होते, बल्कि स्थानीय जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। शासन स्तर पर भी बड़े वृक्षों को काटने के बजाय उनके संरक्षण और पुनर्स्थापन को प्राथमिकता देने की बात कही जाती है। इसके बावजूद यदि बिना स्पष्ट योजना के ऐसे पेड़ों को हटाया जाता है, तो यह पर्यावरण संरक्षण के दावों पर सवाल खड़े करता है।

नागरिकों का कहना है कि एक ओर सरकार और स्थानीय प्रशासन करोड़ों रुपये खर्च कर वृक्षारोपण अभियान चलाते हैं, वहीं दूसरी ओर यदि वर्षों पुराने और जीवित वृक्षों को बचाने के लिए गंभीर प्रयास नहीं किए जाते, तो यह नीति और व्यवहार के बीच के विरोधाभास को दर्शाता है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि खबर लिखे जाने तक नगर परिषद प्रशासन की ओर से इस पेड़ के संबंध में कोई अधिकृत जानकारी या स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। न तो पेड़ को स्थानांतरित करने की योजना सार्वजनिक की गई है और न ही उसके संरक्षण को लेकर कोई घोषणा की गई है।

ऐसे में नागरिकों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं—क्या विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाया जाएगा? क्या इस पीपल के पेड़ को नई जगह जीवन मिलेगा? या फिर यह भी निर्माण कार्य की भेंट चढ़ जाएगा?

फिलहाल घुग्घुस की जनता की नजरें नगर परिषद प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि विकास की इस परियोजना में हरियाली को स्थान मिलता है या फिर एक और पुराना वृक्ष इतिहास बनकर रह जाएगा।

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