प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस शहर की स्थानीय राजनीति इन दिनों आरोप, प्रत्यारोप और शिकायतों के जाल में उलझती नजर आ रही है। कांग्रेस, भाजपा और अपक्ष से जुड़े एस.सी., एस.टी., ओबीसी तथा अन्य वर्गों के नगर सेवकों और नगराध्यक्षों के बीच एक-दूसरे के खिलाफ शिकायतों का सिलसिला लगातार बढ़ता जा रहा है। मुख्यमंत्री, जिला चुनाव अधिकारी, जात पड़ताल अधिकारी, मुख्याधिकारी सहित कई प्रशासनिक अधिकारियों को अर्ज, निवेदन और आक्षेप पत्र सौंपे जाने की जानकारी सामने आ रही है।
सूत्रों के अनुसार, इन शिकायतों में से कुछ मामलों में पत्र देने वाले एक नगर सेवक की सुनवाई भी हो चुकी है, जबकि कई अन्य प्रकरण अभी भी प्रशासनिक स्तर पर लंबित बताए जा रहे हैं। शहर में यह चर्चा भी जोरों पर है कि कुछ प्रभावशाली लोग चंद्रपुर, यवतमाल और नागपुर के विधायक, सांसद, पूर्व मंत्री, वर्तमान मंत्री तथा शिकायतकर्ताओं के रिश्तेदारों और परिचितों के माध्यम से शिकायतें वापस लेने के लिए दबाव बनाने का प्रयास कर रहे हैं।
राजनीतिक गलियारों में यह भी कहा जा रहा है कि जिन लोगों ने शिकायतें की हैं, उन्हीं के खिलाफ जवाबी कार्रवाई के लिए भी अलग-अलग स्तर पर पत्राचार शुरू कर दिया गया है। इससे पूरे मामले ने और अधिक राजनीतिक रंग ले लिया है। एक ओर शिकायतें दर्ज कराई जा रही हैं, वहीं दूसरी ओर शिकायतकर्ताओं को घेरने की रणनीति अपनाई जा रही है।
जानकारी के अनुसार, कई नगर सेवकों, सभापतियों और नगराध्यक्षों के चुनावी दस्तावेजों में त्रुटियां, दूसरे व्यक्तियों के दस्तावेज जोड़ने तथा प्रमाणपत्रों में कथित विसंगतियों की भी चर्चा सामने आ रही है। शहर में यह भी चर्चा है कि महाराष्ट्र के सत्तापक्ष के एक पूर्व मंत्री और विपक्ष के एक वरिष्ठ नेता कुछ नगर सेवकों और नगराध्यक्षों को बचाने की कोशिश में लगे हुए हैं।
अब पूरे शहर की नजर आने वाले दो महीनों पर टिकी हुई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कितने नगर सेवक स्वेच्छा से इस्तीफा देते हैं, कितनों की सदस्यता रद्द होती है और यदि किसी का पद जाता है तो उसकी जिम्मेदारी केवल संबंधित जनप्रतिनिधि की होगी या फिर मुख्याधिकारी, तहसीलदार, चुनाव अधिकारी और जात पड़ताल विभाग के अधिकारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आएगी।
शहर में यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि प्रशासनिक लापरवाही सामने आती है, तो क्या जिम्मेदार अधिकारियों को भी न्यायालय का सामना करना पड़ेगा। फिलहाल इस पूरे प्रकरण पर अधिकांश जनप्रतिनिधि और अधिकारी खुलकर कुछ भी कहने से बचते नजर आ रहे हैं, लेकिन घुग्घुस की राजनीति में यह मामला आने वाले दिनों में और गर्माने की संभावना जताई जा रही है।




