नई दिल्ली : भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा-86 में वैवाहिक जीवन में की जाने वाली क्रूरता को एक संज्ञेय अपराध माना गया है। यह प्रावधान विशेष रूप से उस स्थिति में लागू होता है, जब कोई पति या पति का रिश्तेदार, विवाहिता स्त्री के साथ दुर्व्यवहार करता है, जिससे उसका मानसिक या शारीरिक उत्पीड़न होता है।
धारा 86 के अंतर्गत क्रूरता को दो प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है:
शारीरिक या मानसिक उत्पीड़न, जिससे पत्नी को गंभीर कष्ट या पीड़ा हो, या उसके जीवन, अंग अथवा स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।
दहेज की मांग से संबंधित उत्पीड़न, अर्थात ऐसी कोई भी हरकत जो महिला को स्वयं या उसके परिजनों से दहेज लाने के लिए दबाव बनाने की नीयत से की गई हो।
यह अपराध संज्ञेय, ग़ैर-जमानती, और पति या पत्नी के रिश्तेदार द्वारा किया गया माना जाएगा। यदि आरोप सिद्ध होता है, तो दोषी को 3 वर्ष तक की सज़ा, साथ ही जुर्माना भी हो सकता है।
इस प्रावधान का उद्देश्य महिलाओं को घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करना है। साथ ही, यह संदेश देता है कि वैवाहिक संबंधों में किसी भी प्रकार की क्रूरता को अब कानून के दायरे में लाकर सख्ती से दंडित किया जाएगा।





