घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस के केमिकल वार्ड में नाली निर्माण के लिए नगर परिषद द्वारा अतिक्रमण हटाने की मुहिम शुरू की गई है, जो कि एक अत्यंत सराहनीय कदम है। इस कार्रवाई की स्थानीय नागरिकों ने प्रशंसा की है, लेकिन इसके साथ ही नगर परिषद की निष्पक्षता पर सवाल भी खड़े हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुछ नामचीन नेताओं के दबाव में मानसून पूर्व नाली सफाई हेतु कुछ लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण – जैसे कि सीडी, टीन शेड, दुकानें आदि – को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या नगर परिषद के मुख्याधिकारी का अपने अधिकारियों पर नियंत्रण नहीं है या फिर यह सब जानबूझकर किया जा रहा है?
हाल ही में घुग्घुस कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष और उनके कार्यकर्ताओं द्वारा नगर परिषद के कार्यप्रणाली के खिलाफ आंदोलन भी किया गया था। आंदोलन के कुछ ही दिनों बाद शुरू की गई यह अतिक्रमण हटाओ मुहिम निश्चित रूप से सराहनीय है, लेकिन इसमें निष्पक्षता की कमी से परिषद की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं।
इस संदर्भ में पूर्व उपसरपंच सुधाकर बांधुरकर ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “याला म्हणतात पक्षपात!” उन्होंने आरोप लगाया कि मार्केट लाइन में नाली पर बने चेंबरों पर अतिक्रमण के मामले में नगर परिषद ने राजनीतिक दबाव में आकर कार्रवाई नहीं की। उन्होंने पूछा कि जब नोटिस भेजे जा रहे तो फिर नोटिस का क्या मतलब?
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि अतिक्रमण हटाने की यह मुहिम पूरी तरह निष्पक्ष होनी चाहिए ताकि सभी के साथ समान व्यवहार हो और शहर का विकास बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के हो सके।




