चंद्रपुर, महाराष्ट्र: चंद्रपुर जिले के ग्राम बेलसनी में आगामी 30 मई 2025 को एक महत्वपूर्ण जनसुनवाई का आयोजन किया जा रहा है। यह सुनवाई महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल (MPCB) द्वारा मिलीयन स्टील्स प्राइवेट लिमिटेड की नई औद्योगिक परियोजना को लेकर की जा रही है, जिसका उद्देश्य प्रस्तावित परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (EIA) और पर्यावरण प्रबंधन योजना (EMP) पर आम जनता की राय लेना है।
परियोजना का स्वरूप क्या है?
मिलीयन स्टील्स प्रा. लि. द्वारा प्रस्तावित इस परियोजना में सालाना 2,32,000 टन उत्पादन क्षमता की औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जाएगी। इनमें शामिल हैं:
स्पॉंज आयरन यूनिट: 2X350 टन/दिन की डीआरआई किल्न – कुल 2,31,000 टन/वर्ष.
स्टील मेल्टिंग शॉप (Induction Furnace): 4 यूनिट्स, 2,64,000 टन/वर्ष.
रोलिंग मिल: 1,32,000 टन/वर्ष (TMT बार्स, वायर्स, एंगल्स, बीम्स, चैनल्स आदि का उत्पादन).
कैप्टिव पावर प्लांट: 20 मेगावाट – WHRB और 10 मेगावाट – AFBC तकनीक से ऊर्जा उत्पादन.
किन क्षेत्रों पर हो सकता है प्रभाव?
इस परियोजना का प्रत्यक्ष या परोक्ष प्रभाव चंद्रपुर और भद्रावती तालुका के इन गांवों पर पड़ सकता है:
भद्रावती तालुका: मुर्सा
चंद्रपुर तालुका: सोनेगांव, बेलसनी, शेणगांव, येरुर, म्हातारदेवी, ताडाली, ऊसगांव, वढा
इन गांवों में रहने वाले लोगों को पर्यावरण, जलस्त्रोत, खेती, वन क्षेत्र, जैव विविधता और मानव स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।
स्थानीय नागरिकों की चिंताएँ :
प्रदूषण का स्तर कई गुना बढ़ सकता है. जलस्त्रोतों पर दबाव और खेती योग्य भूमि का नुकसान. जैव विविधता को खतरा. स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों और विस्थापन की आशंका. CSR वादों पर अमल में कमी और लाभ कुछ हाथों तक सीमित रह जाने की आशंका.
चंद्रपुर पहले से ही औद्योगिक और तापीय प्रदूषण से जूझ रहा है। इस नई परियोजना से स्थिति और बदतर हो सकती है।
जनसुनवाई: आपकी आवाज़ मायने रखती है
जनसुनवाई की जानकारी: तारीख: 30 मई 2025, समय: सुबह 11:00 बजे, स्थान: सर्वे नं. 379 से 393 तक, मौजा बेलसनी, ता.चंद्रपुर.
ऑनलाइन शामिल होने का विकल्प:
मीटिंग लिंक: Webex, मीटिंग नंबर: 2518 949 7751, पासवर्ड: 30052025.
MPCB और जिला प्रशासन के अधिकारी इस प्रक्रिया की निगरानी करेंगे।
विकास बनाम जीवन — फैसला जनता करेगी
यह जनसुनवाई केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह स्थानीय लोगों को अपने भविष्य की दिशा तय करने का मौका है। क्या वे पर्यावरण की रक्षा के लिए खड़े होंगे, या फिर ‘विकास’ की अंधी दौड़ में अपने जंगल, ज़मीन, पानी और हवा की कुर्बानी देंगे?
एक ओर यह परियोजना रोजगार और औद्योगिक विकास का वादा करती है, तो दूसरी ओर यह पर्यावरणीय असंतुलन और सामाजिक जोखिम को भी साथ लाती है।
अब यह देखना होगा कि 30 मई को कौन सी आवाज़ ज़्यादा गूंजती है — विकास की या संरक्षण की?
आपकी एक आवाज़, आपके गांव का भविष्य तय कर सकती है। जनसुनवाई में भाग लें, सवाल पूछें, और अपनी बात रखें — क्योंकि जब तक जनता बोलेगी, तब तक विकास विवेकशील रहेगा।




