प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : घुग्घुस के एक विस्तार अधीन औद्योगिक कंपनी परिसर में आज दोपहर अचानक आसमान में तेज लाल लपटें उठती दिखाई देने से इलाके में हड़कंप मच गया। प्रत्यक्षदर्शियों और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटो-वीडियो के अनुसार, शुरुआती कुछ मिनटों तक ऊंची “हाय फ्लेम” दिखाई दी, जिसके बाद परिसर से घना काला धुआं निकलता नजर आया।
स्थानीय नागरिकों के बीच यह चर्चा तेज है कि कंपनी के भीतर कथित रूप से किसी कंप्रेसर मशीन की पाइपलाइन फटने से यह स्थिति उत्पन्न हुई। हालांकि, खबर लिखे जाने तक कंपनी प्रबंधन, पुलिस प्रशासन अथवा किसी अधिकृत विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। इस चुप्पी ने नागरिकों की चिंता और बढ़ा दी है।
घटना के बाद विशेष रूप से प्रभाग क्रमांक 04 स्थित “केमिकल वार्ड” में रहने वाले नागरिकों में भय और असुरक्षा का माहौल दिखाई दिया। लोगों का कहना है कि यदि यह तकनीकी खराबी या गैस/केमिकल संबंधी दुर्घटना थी, तो तत्काल सायरन, अलर्ट सिस्टम और सुरक्षा सूचना क्यों जारी नहीं की गई?
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि औद्योगिक कंपनियों की सुरक्षा व्यवस्था, प्रदूषण नियंत्रण मानकों और आपदा प्रबंधन की वास्तविक स्थिति अक्सर कागजों तक सीमित दिखाई देती है। जब तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं होती, तब तक जिम्मेदार विभागों की सक्रियता दिखाई नहीं देती।
कानूनी दृष्टि से देखा जाए तो यदि कंपनी परिसर में किसी प्रकार की औद्योगिक दुर्घटना, गैस रिसाव, पाइपलाइन विस्फोट अथवा अग्नि-संबंधी घटना हुई है, तो संबंधित कंपनी पर फैक्ट्री अधिनियम, पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, वायु प्रदूषण नियंत्रण कानून तथा औद्योगिक सुरक्षा मानकों के तहत जवाबदेही तय हो सकती है। ऐसे मामलों में घटना की जानकारी तत्काल प्रशासन, पुलिस और प्रदूषण नियंत्रण विभाग को देना आवश्यक माना जाता है।
सबसे बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि इतनी बड़ी लपटें और धुआं सार्वजनिक रूप से दिखाई दे रहा था, तो स्थानीय प्रशासन, नगर परिषद और प्रदूषण नियंत्रण विभाग ने मौके पर तत्काल निरीक्षण किया या नहीं? यदि किया, तो अब तक आधिकारिक जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
राजनीतिक स्तर पर भी हैरानी की बात यह रही कि घटना के कई घंटे बाद तक किसी बड़े जनप्रतिनिधि, स्थानीय नेता अथवा राजनीतिक दल की ओर से कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई। जिस क्षेत्र में प्रदूषण, स्वास्थ्य और औद्योगिक सुरक्षा पहले से संवेदनशील मुद्दे रहे हैं, वहां ऐसी चुप्पी कई सवाल खड़े कर रही है।
अब नागरिकों की नजर इस बात पर टिकी है कि नगर परिषद प्रशासन, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल और जिला प्रशासन इस मामले में क्या भूमिका निभाते हैं। क्या यह घटना केवल “तकनीकी खराबी” बताकर दबा दी जाएगी, या फिर वास्तविक कारणों की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदारों पर कार्रवाई होगी — यही आने वाले दिनों में सबसे बड़ा प्रश्न रहने वाला है।




