प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस (चंद्रपुर): राज्य सरकार द्वारा सुगंधित तंबाकू, गुटखा और पान मसाला की बिक्री व परिवहन पर स्पष्ट प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद चंद्रपुर तालुका के घुग्घुस सहित कई क्षेत्रों में इन प्रतिबंधित उत्पादों की खुलेआम बिक्री जारी है। मुख्य सड़कों से लेकर गली-मोहल्लों तक “खर्रा” के रूप में सुगंधित तंबाकू की उपलब्धता प्रशासनिक उदासीनता का जीता-जागता प्रमाण बन चुकी है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि प्रतिबंध के बावजूद न केवल इन उत्पादों की मांग बढ़ रही है, बल्कि अवैध तस्करी, भंडारण और वितरण भी बड़े पैमाने पर हो रहा है। सवाल यह है कि जब राज्य में इस पर पूर्ण प्रतिबंध लागू है, तो आखिर किसके संरक्षण में यह कारोबार फल-फूल रहा है?
महाराष्ट्र में खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) द्वारा सुगंधित तंबाकू, गुटखा और पान मसाला पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश हैं। कानून के तहत इनके निर्माण, भंडारण, परिवहन और बिक्री—all प्रतिबंधित हैं। इसके बावजूद घुग्घुस और आसपास के क्षेत्रों में नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जो सीधे तौर पर प्रशासन की निष्क्रियता या संभावित मिलीभगत की ओर इशारा करती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, इन उत्पादों के सेवन से कैंसर, हृदय रोग और अन्य गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। चिंताजनक बात यह है कि युवाओं और महिलाओं में भी इसकी लत तेजी से फैल रही है, जिससे आने वाली पीढ़ी का स्वास्थ्य खतरे में पड़ रहा है। इस पर कई सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी कड़ी आपत्ति जताते हुए तत्काल कार्रवाई की मांग की है।
कानूनी दृष्टि से देखें तो यह मामला केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं है, बल्कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 तथा संबंधित राज्य अधिसूचनाओं के तहत दंडनीय अपराध की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों में दोषियों पर जुर्माना, लाइसेंस रद्द करने से लेकर आपराधिक कार्रवाई तक का प्रावधान है।
इसके बावजूद, संबंधित विभागों द्वारा कोई ठोस कदम न उठाना कई सवाल खड़े करता है। नागरिकों की मांग है कि—
अवैध विक्रेताओं पर तत्काल छापेमारी की जाए
भंडारण और सप्लाई चेन का पर्दाफाश किया जाए
दोषी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए
यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई, तो यह समस्या केवल कानून व्यवस्था का नहीं, बल्कि जनस्वास्थ्य के बड़े संकट का रूप ले सकती है।




