कोविड काल की 22 महीने की बकाया प्रोत्साहन राशि तत्काल देने की मांग, आंदोलनकारियों के साथ खड़े रहने का दिया भरोसा
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : कोरोना महामारी के कठिन दौर में अपनी जान और परिवार के स्वास्थ्य की परवाह किए बिना जनसेवा करने वाली आशा स्वयंसेविकाओं की कोविड काल की बकाया प्रोत्साहन राशि का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। घुग्घुस की 32 आशा स्वयंसेविकाओं द्वारा बकाया राशि की मांग को लेकर शुरू किए गए अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन को अब अष्टविनायक बहुउद्देशीय संस्था ने अपना जाहीर समर्थन दिया है।
संस्था की ओर से 6 नवंबर 2026 को जारी समर्थन पत्र में आंदोलनकारी आशा स्वयंसेविकाओं के प्रति एकजुटता व्यक्त करते हुए उनके न्यायोचित आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने की घोषणा की गई है।

समर्थन पत्र के अनुसार, कोरोना महामारी के दौरान आशा स्वयंसेविकाओं ने घर-घर जाकर सर्वेक्षण, स्वास्थ्य संबंधी जनजागृति और प्रशासन द्वारा सौंपी गई जोखिमपूर्ण जिम्मेदारियों का निर्वहन किया था। इसके बदले शासन की ओर से प्रतिमाह 1,000 रुपये के हिसाब से 24 महीने की प्रोत्साहन राशि घोषित की गई थी। हालांकि, इसमें से 22 महीने की राशि पिछले 5 से 6 वर्षों से लंबित होने का मुद्दा संस्था ने उठाया है।
पत्र में कहा गया है कि इस संबंध में प्रशासन को कई बार निवेदन देने और समयसीमा निर्धारित करने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। इसके चलते आशा स्वयंसेविकाओं को 4 नवंबर 2026 से घुग्घुस के साप्ताहिक बाजार स्थित रंगमंच पर अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन शुरू करना पड़ा।
अष्टविनायक बहुउद्देशीय संस्था ने स्पष्ट किया है कि वह इस न्याय की लड़ाई में सभी आंदोलनकारी आशा स्वयंसेविकाओं के साथ मजबूती से खड़ी है। संस्था ने उनकी मांगों का समर्थन करते हुए बकाया प्रोत्साहन राशि के प्रश्न पर प्रशासन से गंभीरता से ध्यान देने की अपेक्षा जताई है।
अब देखना होगा कि आशा स्वयंसेविकाओं के इस आंदोलन और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के समर्थन के बाद प्रशासन उनकी बकाया प्रोत्साहन राशि के भुगतान को लेकर क्या कदम उठाता है।




