चंद्रपुर–यवतमाल सीमा पर रेत उत्खनन की निगरानी जरूरी; GPS-ड्रोन सर्वेक्षण, ई-टीपी और घाटवार रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी वास्तविक स्थिति
प्रणयकुमार बंडी
चंद्रपुर/यवतमाल : चंद्रपुर और यवतमाल जिलों से सटी वर्धा तथा पैनगंगा नदी के रेत घाटों पर उत्खनन, रेत परिवहन, सरकारी अनुमति और रॉयल्टी भुगतान को लेकर निगरानी एवं पारदर्शिता महत्वपूर्ण मुद्दे बने हुए हैं। रेत घाटों के आवंटन और परिवहन पर नियंत्रण के लिए सरकारी डिजिटल व्यवस्था उपलब्ध है, वहीं चंद्रपुर जिले में अवैध रेत परिवहन के विरुद्ध हालिया कार्रवाई और घाटों के GPS-ड्रोन सर्वेक्षण की खबरों ने खनन व्यवस्था की निगरानी को चर्चा में ला दिया है।
हालाँकि, उपलब्ध समाचारों से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि दोनों नदियों के सभी घाटों पर अवैध उत्खनन हो रहा है। प्रत्येक घाट की वास्तविक स्थिति उसके ठेका आदेश, स्वीकृत क्षेत्र, पर्यावरणीय मंजूरी, रॉयल्टी भुगतान और परिवहन रिकॉर्ड के आधार पर ही तय की जा सकती है।

12 ट्रक जब्त, करीब 3.50 करोड़ रुपये का माल
28 सितंबर 2026 को प्रकाशित पुढारी की रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रपुर मुख्यालय से मूल मार्ग पर राजस्व विभाग की टीम ने कथित अवैध तथा क्षमता से अधिक गौण खनिज परिवहन के मामले में 12 हाइवा ट्रक जब्त किए। रिपोर्ट में जब्त सामग्री और वाहनों का कुल मूल्य लगभग 3.50 करोड़ रुपये बताया गया, जबकि करीब 35 लाख रुपये का दंड प्रस्तावित होने की जानकारी दी गई। कुछ वाहनों के पास आवश्यक परिवहन पास या परमिट नहीं होने की बात भी रिपोर्ट में कही गई।
यह कार्रवाई अवैध परिवहन पर नियंत्रण की आवश्यकता को रेखांकित करती है। लेकिन रिपोर्ट में यह प्रमाणित नहीं है कि सभी ट्रक वर्धा या पैनगंगा नदी के किसी विशिष्ट घाट से ही रेत लेकर आए थे। इसलिए इस कार्रवाई को किसी खास घाट से जोड़ने से पहले संबंधित वाहन और लोडिंग स्थल के रिकॉर्ड की जाँच आवश्यक है।

74 रेत घाटों का GPS-ड्रोन सर्वेक्षण
18 मई 2026 को प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रपुर जिले में जिलाधिकारी के आदेश पर 74 रेत घाटों की GPS आधारित ड्रोन से माप-जोख शुरू की गई थी। यह कदम स्वीकृत सीमा से बाहर उत्खनन, निर्धारित गहराई से अधिक खुदाई और अतिरिक्त रेत निकासी की शिकायतों की जाँच के लिए उठाया गया था। रिपोर्ट में पैनगंगा, वैनगंगा, वर्धा और प्राणहिता सहित जिले की प्रमुख नदियों का उल्लेख किया गया।
इस सर्वेक्षण की वास्तविक उपयोगिता अंतिम रिपोर्ट में होगी। यदि माप-जोख में स्वीकृत सीमा से बाहर खुदाई या अनुमति से अधिक रेत निकासी सामने आती है, तो संबंधित घाट के रिकॉर्ड और जिम्मेदार पक्षों की जाँच की जा सकती है। उपलब्ध समाचार में सर्वेक्षण शुरू होने की जानकारी है; इससे सभी घाटों के अंतिम निष्कर्ष प्रमाणित नहीं होते।

पैनगंगा नदी क्षेत्र में भी शिकायतों पर कार्रवाई
14 मई 2026 की एक रिपोर्ट में कोरपना तहसील के कारवाही–कोडशी रेत घाटों पर पोकलेन मशीनों से कथित नियमविरुद्ध उत्खनन की शिकायतों का उल्लेख किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, इन शिकायतों के बाद खनन विभाग ने निरीक्षण और निगरानी बढ़ाई।
यह मामला पैनगंगा नदी क्षेत्र में घाटवार निगरानी की आवश्यकता को सामने लाता है। लेकिन किसी घाट पर शिकायत दर्ज होना और आरोपों का जाँच में सिद्ध होना अलग-अलग बातें हैं। संबंधित निरीक्षण रिपोर्ट, पंचनामा और अंतिम कार्रवाई के आदेश सार्वजनिक होने पर ही मामले की पूरी स्थिति स्पष्ट होगी।

वैध ठेका और रॉयल्टी की जाँच कैसे हो?
महाराष्ट्र सरकार का महाखनिज 2.0 पोर्टल खनिज उत्खनन और परिवहन के लिए डिजिटल व्यवस्था प्रदान करता है। इसके माध्यम से ई-टीपी/डिजिटल परिवहन पास, वाहन निगरानी, ई-नीलामी एवं आवंटन, ऑनलाइन भुगतान और शिकायत निवारण जैसी सुविधाएँ उपलब्ध हैं।
किसी रेत घाट से निकलने वाले वाहन की वैधता जाँचने के लिए कुछ दस्तावेज महत्वपूर्ण हैं. ठेका और आवंटन आदेश: संबंधित घाट किसे आवंटित हुआ और अनुमति कब तक वैध है। पर्यावरणीय मंजूरी: उत्खनन का स्वीकृत क्षेत्र, अधिकतम मात्रा और लागू शर्तें। रॉयल्टी भुगतान: संबंधित मात्रा के लिए सरकारी भुगतान का प्रमाण। ई-टीपी/परिवहन पास: वाहन नंबर, रेत की मात्रा, स्रोत, गंतव्य और पास की वैधता। निरीक्षण रिकॉर्ड: GPS-ड्रोन सर्वेक्षण, सीमा निर्धारण, जब्ती और दंडात्मक कार्रवाई की रिपोर्ट।
महाखनिज पोर्टल के आधिकारिक FAQ के अनुसार, रॉयल्टी ट्रांसपोर्ट परमिट (RTP) उन खदानों के लिए जारी होता है जहाँ निर्धारित रॉयल्टी का भुगतान करने के बाद उत्खनन और परिवहन की अनुमति होती है। इसलिए केवल ट्रक पर रेत लदी होने या चालक के पास किसी सामान्य दस्तावेज के होने से उसकी ढुलाई वैध नहीं मानी जा सकती।

प्रशासन से उठते हैं ये महत्वपूर्ण सवाल
वर्धा और पैनगंगा नदी के चंद्रपुर–यवतमाल सीमा क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित जिला खनन अधिकारियों, जिलाधिकारियों और तहसील प्रशासन से कुछ जानकारी सार्वजनिक करने की अपेक्षा की जा सकती है. जिसमें 2026–27 में किन घाटों का अंतिम आवंटन हुआ और उनके ठेकेदार कौन हैं? प्रत्येक घाट के लिए कितनी रेत निकालने की मंजूरी है और अब तक कितनी मात्रा निकाली गई? संबंधित घाटों से कितने ई-टीपी जारी हुए और कितनी रॉयल्टी जमा की गई? क्या स्वीकृत सीमा से बाहर उत्खनन या निर्धारित मात्रा से अधिक रेत निकालने के मामले सामने आए? GPS-ड्रोन सर्वेक्षण की अंतिम रिपोर्ट में क्या निष्कर्ष निकले? बिना वैध पास या क्षमता से अधिक खनिज ले जाने वाले वाहनों पर कितनी कार्रवाई हुई और कितने मामलों में दंड वसूला गया?
इन सवालों का उत्तर केवल निरीक्षण और रिकॉर्ड से मिल सकता है। किसी ठेकेदार, अधिकारी या परिवहनकर्ता की भूमिका के संबंध में निष्कर्ष निकालने से पहले संबंधित पक्षों का जवाब और उपलब्ध आधिकारिक दस्तावेज भी देखे जाने चाहिए।

ध्यान आकर्षण की बात यह है कि, वर्धा और पैनगंगा नदी के रेत घाटों के संबंध में उपलब्ध रिपोर्टें बताती हैं कि चंद्रपुर जिले में अवैध परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई हुई है और घाटों की माप-जोख के लिए GPS-ड्रोन सर्वेक्षण शुरू किया गया था। पैनगंगा क्षेत्र में भी कथित नियमविरुद्ध उत्खनन की शिकायतों पर निगरानी की खबरें प्रकाशित हुई हैं।
अब सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि प्रत्येक घाट के स्वीकृत ठेके, वास्तविक उत्खनन, रॉयल्टी भुगतान और परिवहन पास के रिकॉर्ड में कितना मेल है। 12 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी से दोनों नदियों के सभी घाटों की वर्तमान अनुमति और रॉयल्टी का एकीकृत, सत्यापित विवरण स्थापित नहीं होता। इसलिए घाटवार सरकारी आदेश और निरीक्षण रिपोर्ट सामने आने पर ही वैध गतिविधियों तथा कथित अनियमितताओं की स्पष्ट तस्वीर मिल सकेगी।




