घुग्घुस (चंद्रपुर): घुग्घुस में छत्रपति शिवाजी महाराज चौक को लेकर राजनीति चरम पर है. सूत्रों के अनुसार, आज गुरुवार, 06 फरवरी 2025 को विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक दलों के नेताओं ने एकता का प्रदर्शन किया, लेकिन नागरिकों का सवाल यह है कि यही एकता अन्य सामाजिक और विकास कार्यों पर क्यों नहीं दिखाई देती? स्थानीय लोग इसे मिली-जुली सरकार की राजनीति और एक ही नेता के समर्थकों का खेल मान रहे हैं.
क्या केवल राजनीति हो रही है?
स्थानीय चर्चाओं के मुताबिक, पहले से ही PWD रोड चौराहे को छत्रपति शिवाजी महाराज चौक नाम दिया गया था. अब उसी स्थान पर छत्रपति शिवाजी महाराज का अश्वारूढ़ स्मारक बनाने की घोषणा के पीछे राजनीतिक खेल नजर आ रहा है. सवाल उठ रहे हैं कि—
विधायक द्वारा पहले निधि देने का आश्वासन देने के बावजूद, अब उसी मुद्दे पर धरना देना कितना उचित है?
स्मारक चौक के बीच में बनेगा या किसी कोने में?
क्या इसके लिए आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी की गई है, या सिर्फ राजनीति की जा रही है?
RR चौक की यातायात समस्या पर चुप्पी क्यों साधी जा रही है?
जनता के असली मुद्दे क्या हैं?
नागरिकों का मानना है कि जो एकता आज दिखाई दी, वही यदि घुग्घुस की असली समस्याओं को हल करने में लगाई जाती, तो शहर की तस्वीर बदल सकती थी. कुछ प्रमुख समस्याएँ इस प्रकार हैं—
अतिक्रमण और अवैध गतिविधियाँ.
अवैध लेआउट और अवैध वाहन पार्किंग.
सड़क और ड्रेनेज की बदहाल स्थिति.
प्रदूषण और स्वास्थ्य सुविधाओं की अनदेखी.
अवैध बैनर और होर्डिंग का अतिक्रमण.
MIDC क्षेत्र में बुनियादी सुविधाओं की कमी.
राजीव रतन रेलवे गेट बना सिरदर्द
गांधीनगर, सुभाष नगर, इंदिरानगर, राजीव कॉलोनी, रामनगर, शिवनगर, शास्त्री नगर और अन्य इलाकों के नागरिकों के अनुसार, राजीव रतन रेलवे गेट सबसे बड़ी समस्या बन चुका है. PWD और रेलवे प्रशासन नागरिकों की जरूरतों को अनदेखा कर रहा है.
क्या विधायक किशोर जोर्गेवार दिखाएंगे गंभीरता?
चंद्रपुर विधानसभा क्षेत्र के बीजेपी विधायक किशोर जोर्गेवार ने शिवाजी महाराज के अश्वारूढ़ स्मारक में रुचि दिखाई है, लेकिन सवाल यह है कि—
क्या वे बाकी सामाजिक और नागरिक समस्याओं पर भी ध्यान देंगे?
या फिर यह सिर्फ राजनीतिक दिखावा है?
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह मुद्दा सिर्फ चुनावी राजनीति तक सीमित रहता है, या फिर विधायक और प्रशासन वास्तव में जनता की समस्याओं का समाधान करने की दिशा में कदम उठाते हैं. नागरिकों की नजरें अब इन नेताओं की अगली चाल पर टिकी हुई हैं.




