अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग न करें
चंद्रपुर : सरकारी कर्मचारी नेताओं के इशारों पर नाचने वाले कार्यकर्ता बन गए हैं, क्योंकि वे समय-समय पर अधिकारियों और कर्मचारियों को दोषी ठहराने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं. ऐसे में चंद्रपुर तहसीलदार द्वारा जारी एक पत्र ने चंद्रपुर के तहसीलदार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. समृद्धि लोककल्याणकारी संस्था घुग्घुस की ओर से अध्यक्ष किरण विवेक बोडे ने सर्वे क्रमांक 17 की 0.43 हेक्टेयर आर भूमि अधिग्रहण के लिए तहसील प्रशासन को आवेदन दिया. चंद्रपुर तहसीलदार ने 8 अगस्त 2024 को ज़हीरनामा की घोषणा की. इस सूचना पत्र पर आपत्ति दर्ज कराने की तारीख 30 अगस्त 2024 थी. लेकिन उक्त सूचना पत्र घुग्घुस नगर परिषद के अधिकारी के पास आखरी समय पर 30 अगस्त 2024 को पहुंचा. शहर के सामाजिक कार्यकर्ताओं, विभिन्न दलों के नेताओं और अन्य नागरिकों को इसकी जानकारी नहीं होने पर रोष व्यक्त किया और ज्ञापन सौंपने लगे. साथ ही पत्र पर आपत्ति जताते हुए संबंधित अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की.
चंद्रपुर तहसील प्रशासन का एक कारनामा सामने आया है. घुग्घुस शहर के नायब तहसील कार्यालय के सामने राजस्व विभाग की जमीन पर एक राजनीतिक दल द्वारा पिछले कुछ वर्षों से एक सेवा केंद्र चलाया जा रहा है. इस जगह को वैध बनाने के लिए अब चंद्रपुर के तहसील प्रशासन की ओर से पूरा सहयोग मिलना शुरू हो गया है. अब यह घोषणापत्र जनता के बीच कब पहुंचेगा और क्या लोग इस राजनीतिक साजिश में शामिल होंगे, व्यापारियों को उनकी आजीविका के लिए न्याय मिलेगा?
नेताओं के अनुसार करीब 5 साल पहले भाजपा के कुछ स्थानीय नेता नायब तहसील के सामने राजस्व विभाग की खुली जमीन पर सुधीर भाऊ मुनगंटीवार सेवा केंद्र के नाम से अवैध किराए की जमीन पर अपनी सेवाएं दे रहे थे. क्योंकि वह सत्तारूढ़ भाजपा पार्टी के दिग्गज नेता हैं और चंद्रपुर के पालक मंत्री भी हैं. इसके चलते कलेक्टर, तहसीलदार, मंडल अधिकारी, पटवारी, तलाठी, राजस्व विभाग, मुख्याधिकारी और पुलिस प्रशासन किसी ने भी कोई सख्त कार्रवाई नहीं की. लेकिन उन्होंने जो काम किया है वह क्लीन स्वीप से कहीं ज्यादा है. जो अब उल्टा नजर आ रहा है.
यदि नागरिकों को कोई आपत्ति है तो मुख्य प्रश्न यह उठता है कि वे एक ही दिन में अपनी आपत्तियां कैसे दर्ज करेंगे और यह सब घुग्घुस स्थित नगर परिषद कार्यालय द्वारा जानबूझकर ऐसा किया गया ताकि नागरिकों की ओर से कोई लिखित आपत्ति न हो, तत्काल कार्रवाई की जानी चाहिए और संबंधित अधिकारियों को निलंबित किया जाना चाहिए और निलंबित किया जाना चाहिए. क्योंकि 24 साल पहले घुग्घुस में सभी दिव्यांग संगठन ने इस जगह की मांग की थी, लेकिन यह जगह दिए बिना प्रशासन उस संगठन को जगह कैसे दे रहा है. इसकी जांच होनी चाहिए.
अमित बोरकर (आम आदमी पार्टी, घुग्घुस शहर अध्यक्ष)
मामले की जानकारी जैसे ही कांग्रेस नेताओं को हुई तो कांग्रेस अध्यक्ष राजुरेड्डी के मार्गदर्शन में और कांग्रेस पदाधिकारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्याधिकारी नीलेश रंजनकर से जवाब मांगा, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से स्वीकार किया कि उन्हें इस मामले में सार्वजनिक नोटिस मिला है. 02 सितंबर को मामले में नोटिस बोर्ड पर लगा दिया और इसमें अपनी भी कोई गलती नहीं बताई. कांग्रेस नेता वरिष्ठ स्तर पर कार्रवाई को लेकर कदम बढ़ा रहे हैं.
मजदूर नेता सैय्यद अनवर (कामगार नेता)
शहर में पुलिस भवनों के लिए आरक्षित सरकारी परिसर में किसी भी प्रकार का इंटरफर्नेस योग्य नहीं है. यादी पोलिस उक्त स्थल की आवश्यकता नहीं है तो सरकारी तहसील कार्यालय, नगर परिषद कार्यालय, मंडल अधिकारी कार्यालय, पटवारी कार्यालय, फ्री सभा गृह, इमरजेंसी सरकारी वेहिकल पार्किंग स्टैंड, राजस्व विभाग कार्यालय, महसुल विभाग कार्यालय, नगर परिषद कार्यालय जैसे अन्य सरकारी इमारतों का निर्माण किया जाना चाहिए.
राजकुमार वर्मा उर्फ़ दादू (तालुका अध्यक्ष अनुसूचित जाति विभाग चंद्रपुर ग्रामीण कांग्रेस कमेटी)
अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग न करें और नियमों के अनुरूप कार्य करें. घुग्घुस के कुछ लोग किसी भी गलत काम में सहयोग नहीं करेंगे. जो भी कार्य अवैध तरीके से चल रहा है उसे तत्काल रोका जाए अन्यथा शिकायत संबंधित कार्यालय एवं मुख्यमंत्री कार्यालय को भेज दी जाएगी. दोषी अधिकारियों व कर्मचारियों पर कार्रवाई होनी चाहिए.
प्रणयकुमार बंडी (ब्रिथ ऑफ़ लाइफ मल्टीपरपज सोसायटी/अध्यक्ष/संस्थापक)




