कोविड काल के 22 महीने के बकाया प्रोत्साहन राशि की मांग को लेकर घुग्घुस नगर परिषद के खिलाफ अनिश्चितकालीन धरना जारी

प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : दिवाली का त्योहार नजदीक है और हर तरफ रोशनी एवं खुशियों की तैयारी चल रही है। वहीं दूसरी ओर घुग्घुस की 32 आशा स्वयंसेविकाएं अपने हक की बकाया प्रोत्साहन राशि के लिए सड़क पर संघर्ष करने को मजबूर हैं। कोविड-19 महामारी के दौरान किए गए कार्यों की 22 महीने की बकाया प्रोत्साहन राशि की मांग को लेकर 4 नवंबर 2026 से घुग्घुस नगर परिषद के खिलाफ स्थानीय साप्ताहिक बाजार के रंगमंच पर अनिश्चितकालीन धरना आंदोलन शुरू किया गया है।
आंदोलन के दूसरे दिन 5 नवंबर को भी आशा स्वयंसेविकाओं का धरना जारी है। दिवाली से ठीक पहले इन महिलाओं को रातभर आंदोलन स्थल पर सड़क पर गुजारनी पड़ी। आंदोलन में शामिल कुछ महिलाओं के घर छोटे बच्चे हैं, तो कुछ महिलाएं ब्लड प्रेशर और मधुमेह जैसी स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही हैं। इसके बावजूद वे अपनी मांगों को लेकर आंदोलन पर डटी हुई हैं।
आशा स्वयंसेविकाओं के अनुसार, कोविड-19 महामारी के कठिन दौर में उन्होंने अपनी और अपने परिवार की चिंता किए बिना घर-घर जाकर सर्वेक्षण, स्वास्थ्य जागरूकता, नागरिकों की जानकारी संकलित करने सहित स्वास्थ्य विभाग की विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। उस दौरान 24 महीनों तक प्रतिमाह 1,000 रुपये प्रोत्साहन राशि देने की बात कही गई थी। लेकिन उनका दावा है कि उन्हें केवल दो महीने की राशि मिली और शेष 22 महीनों की राशि अब तक नहीं दी गई है। इस मामले को करीब पांच वर्ष बीत जाने के बावजूद कोई ठोस समाधान नहीं निकला है।
इस संबंध में पहले भी प्रशासन को निवेदन दिया गया था। 12 अक्टूबर को 15 दिन और 27 अक्टूबर को सात दिन की समयसीमा देते हुए मांग पूरी नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। इसके बावजूद कोई ठोस निर्णय नहीं होने से 4 नवंबर से बेमुदत धरना शुरू किया गया।
जनप्रतिनिधि पर अभद्र व्यवहार का आरोप
आंदोलनकारियों का आरोप है कि आंदोलन स्थल पर पहुंचीं घुग्घुस के एक जनप्रतिनिधि ने आशा स्वयंसेविकाओं से कथित रूप से उद्धट भाषा में और ‘अरे-तुरे’ करते हुए बातचीत की। आंदोलनकारियों का कहना है कि अपनी मांगों को लेकर शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन कर रही महिलाओं के साथ सम्मानपूर्वक संवाद किया जाना चाहिए।
आजाद समाज पार्टी के विदर्भ सचिव सुरेश मल्हारी पाईकराव ने आरोप लगाया कि एक जनप्रतिनिधि ने आंदोलन स्थल पर आकर आंदोलनकारियों से विवाद करने और आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि आशा स्वयंसेविकाएं किसी से भीख नहीं मांग रही हैं, बल्कि अपने परिश्रम और सेवा के बदले मिलने वाली हक की राशि मांग रही हैं।
पाईकराव ने यह भी आरोप लगाया कि नगराध्यक्षा और मुख्याधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे हैं। नगराध्यक्षा की ओर से मुख्याधिकारी पर और मुख्याधिकारी की ओर से नगराध्यक्षा पर भुगतान नहीं करने की जिम्मेदारी डालने की बात कही जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर आशा स्वयंसेविकाओं की बकाया राशि का भुगतान क्यों नहीं हो रहा है।
इनके नेतृत्व में आंदोलन जारी
यह आंदोलन आजाद समाज पार्टी के विदर्भ सचिव सुरेश मल्हारी पाईकराव के मार्गदर्शन में जिला महासचिव रिताताई फकरु देशकर के नेतृत्व में 32 आशा स्वयंसेविकाओं द्वारा किया जा रहा है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि कोविड काल के 22 महीनों की बकाया प्रोत्साहन राशि तत्काल अदा की जाए और आंदोलन में शामिल महिलाओं के साथ सम्मानजनक व्यवहार किया जाए।
सुरेश पाईकराव ने पुलिस प्रशासन से भी अपील की है कि आंदोलन समाप्त होने तक रात के समय भी आंदोलन स्थल पर पुलिस बंदोबस्त रखा जाए।
आशा स्वयंसेविकाओं ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित और ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन आंदोलन जारी रहेगा।
दूसरों के स्वास्थ्य की रक्षा के लिए कोविड जैसे कठिन समय में अपनी सेवाएं देने वाली इन आशा स्वयंसेविकाओं को आज अपने ही मेहनताने के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अब देखना यह है कि दिवाली के इस पर्व पर नगर परिषद और प्रशासन उनकी मांगों पर क्या निर्णय लेते हैं।




