शिवनी, चिंचोली सहित विभिन्न गांवों में जमीन की खरीद-बिक्री और छोटे निर्माणों की जांच की मांग; अब सरकारी कार्रवाई पर टिकी निगाहें
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घूस, चंद्रपुर/यवतमाल : यवतमाल जिले की वणी तहसील के शिवनी, चिंचोली सहित विभिन्न गांवों में कथित अवैध प्लॉटिंग, कृषि भूमि के अनधिकृत विभाजन और बिना आवश्यक अनुमति के छोटे निर्माणों के माध्यम से जमीन-मकान की खरीद-बिक्री किए जाने का मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए अब एक दूसरे युवक ने भी महाराष्ट्र सरकार के मंत्रियों को डाक के माध्यम से निवेदन भेजा है।
इससे पहले भी एक युवक ने इसी मुद्दे को लेकर मंत्रियों को पत्र भेजकर मामले की जांच और उचित कार्रवाई की मांग की थी। अब दूसरे युवक की ओर से निवेदन भेजे जाने के बाद इस प्रकरण को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।

कृषि भूमि पर प्लॉटिंग और छोटे निर्माणों की जांच की मांग
दूसरे युवक द्वारा भेजे गए निवेदन में आरोप लगाया गया है कि वणी तहसील के शिवनी, चिंचोली सहित अन्य गांवों तथा चंद्रपुर जिले के घुग्घूस और संबंधित क्षेत्रों में कृषि भूमि, गांवठाण क्षेत्र एवं अन्य जमीनों पर कथित रूप से छोटे-छोटे भूखंड बनाकर बिक्री की जा रही है। कुछ स्थानों पर 8×10, 10×10 और 10×12 फुट के कमरों तथा अन्य छोटे निर्माणों के माध्यम से जमीन-मकान का कारोबार किए जाने की शिकायतों का भी उल्लेख किया गया है।
निवेदन में संबंधित भूमि की वैधानिक स्थिति, सातबारा अभिलेख, नमूना 8-अ, फेरफार प्रविष्टियां, भूमि उपयोग परिवर्तन (NA), लेआउट की मंजूरी और निर्माण अनुमति की जांच करने की मांग की गई है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि होना अभी बाकी है।
WCL परियोजनाओं के नाम पर खरीदारों को आकर्षित करने की आशंका
निवेदन में वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (WCL) की संभावित खदान विस्तार परियोजनाओं तथा भविष्य में भूमि प्रभावित होने की आशंका से संबंधित दावों की भी जांच करने का आग्रह किया गया है।
शिकायतकर्ता का कहना है कि यदि जमीन या कमरे खरीदने के लिए लोगों को भविष्य में मुआवजा, पुनर्वास अथवा अन्य लाभ मिलने का भरोसा दिलाया जा रहा है, तो ऐसे दावों की वास्तविकता आधिकारिक अभिलेखों के आधार पर सत्यापित की जानी चाहिए। केवल खदान विस्तार की संभावना के आधार पर किसी खरीदार को मुआवजे या पुनर्वास का अधिकार स्वतः प्राप्त नहीं होता।

मुख्यमंत्री सहित तीन मंत्रियों से कार्रवाई की मांग
प्राप्त निवेदन के अनुसार, यह पत्र मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले तथा उपमुख्यमंत्री एवं सार्वजनिक निर्माण कार्य मंत्री एकनाथ शिंदे को संबोधित किया गया है।
निवेदन में राजस्व, नगर रचना, स्थानीय निकाय और पुलिस विभाग के सक्षम अधिकारियों की संयुक्त जांच समिति गठित करने, संबंधित जमीनों के दस्तावेजों की पड़ताल करने तथा जमीन और कमरों की खरीद-बिक्री से जुड़े लेन-देन की जांच करने की मांग की गई है।
इसके अलावा, यदि जांच में अनियमितताएं, भ्रामक आश्वासन या आर्थिक धोखाधड़ी प्रमाणित होती है, तो संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कानूनी कार्रवाई करने और प्रभावित खरीदारों को उपलब्ध वैधानिक राहत दिलाने का आग्रह किया गया है।
अब देखना होगा, कार्रवाई होगी या मामला फाइलों में ही रहेगा!
इस प्रकरण में दूसरे युवक द्वारा भी निवेदन भेजे जाने से यह मामला अब केवल एक शिकायत तक सीमित नहीं रह गया है। हालांकि, निवेदन भेजे जाने मात्र से आरोप सिद्ध नहीं होते और संबंधित विभागों की जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित विभाग इस मामले की निष्पक्ष जांच कर ठोस कार्रवाई करेंगे, या जमीन की कथित अनियमितताओं से जुड़ा यह सवाल सरकारी फाइलों में ही दबकर रह जाएगा?
फिलहाल, संबंधित विभागों की ओर से जांच या कार्रवाई के संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आम नागरिकों और संभावित खरीदारों की नजरें अब सरकार तथा प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।




