संजीवनी पर्यावरण सामाजिक संस्था के अध्यक्ष राजेश बेले ने की घोषणा; कारखाने की पर्यावरण अनुमति रद्द करने और मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग
प्रणयकुमार बंडी
मुंबई : चंद्रपुर जिले के घुग्घूस स्थित मेटल्स एंड एनर्जी कारखाने से कथित वायु और जल प्रदूषण होने का आरोप लगाते हुए संजीवनी पर्यावरण सामाजिक संस्था के संस्थापक अध्यक्ष राजेश वारलुजी बेले ने 26 अक्टूबर 2026 को मुंबई के आजाद मैदान में बेमुदत अन्नत्याग आंदोलन करने की घोषणा की थी।
संस्था का आरोप है कि कारखाने से निकलने वाले धुएं, रासायनिक पदार्थों से युक्त गंदे पानी और औद्योगिक कचरे के अनुचित निपटान के कारण आसपास की खेती, जलस्रोतों, नागरिकों के स्वास्थ्य तथा पशु-पक्षियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। निवेदन में उसगांव नाले में रासायनिक पानी छोड़े जाने और इसके कारण वर्धा नदी के पानी तथा कृषि भूमि प्रभावित होने का भी आरोप लगाया गया है।

कारखाने की पर्यावरण अनुमति रद्द करने की मांग
संस्था ने कारखाने की पर्यावरण अनुमति रद्द करने तथा प्रदूषण संबंधी शिकायतों की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। साथ ही महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के चंद्रपुर स्थित क्षेत्रीय और उपक्षेत्रीय कार्यालय के संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच कर दोषी पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग भी की गई है।
आंदोलनकारियों ने नदी, नालों और खेतों के पानी की वैज्ञानिक जांच कराने तथा जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की है। इसके अलावा औद्योगिक गंदा पानी और खतरनाक कचरे का उचित निपटान सुनिश्चित करने और कथित प्रदूषण से प्रभावित किसानों व नागरिकों को न्याय दिलाने की मांग उठाई गई है।
किसानों ने न्याय नहीं मिलने पर आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी
निवेदन में किसान मोहनदास धोंडूजी राजूरकर, वामन बापूजी राजूरकर, बंडू धोंडूजी राजूरकर, रामरतन बापूजी राजूरकर और नितेश पांडुरंग ठाउरी सहित अन्य किसानों ने न्याय नहीं मिलने तक अन्नत्याग आंदोलन जारी रखने की बात कही है।

संस्था के अनुसार, इस मामले में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे, महाराष्ट्र प्रदूषण नियंत्रण मंडल के सदस्य सचिव राहुल रेखावार और चंद्रपुर की जिलाधिकारी वसुमती पंत सहित संबंधित अधिकारियों को निवेदन दिया गया है।
संस्था का कहना है कि पहले भी कई बार शिकायतें देने के बावजूद ठोस कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन का निर्णय लिया गया। आंदोलन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की गई है।
संजीवनी पर्यावरण सामाजिक संस्था के अध्यक्ष राजेश वारलुजी बेले तथा संबंधित किसानों और कार्यकर्ताओं ने किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और पर्यावरण प्रेमियों से आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।




