85 लाख रुपये के कथित भ्रष्टाचार के आरोपों से लेकर ₹57,70,034 के चुनावी खर्च तक मामला गरमाया; नगर परिषद के सर्वसाधारण सभा के ठराव के बाद विभागीय जांच और पांच सदस्यीय समिति गठित करने की मांग
प्रणयकुमार बंडी
घुग्घुस, चंद्रपुर : महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की घुग्घुस नगर परिषद में चुनावी खर्च को लेकर एक नया विवाद सामने आया है। नगर परिषद के सार्वजनिक बांधकाम, शिक्षा एवं क्रीड़ा विभाग के सभापति रोशन परशुराम पचारे ने 14 अक्टूबर 2026 को जिलाधिकारी, चंद्रपुर को पत्र लिखकर चुनावी खर्च से जुड़े कथित भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है। वहीं, नगर परिषद की सर्वसाधारण सभा में प्रस्तुत ठराव में वर्ष 2025 के चुनाव के दौरान हुए खर्च का विवरण सामने आया है, जिसमें कुल ₹57,70,034 खर्च दर्ज है।
दस्तावेजों के सामने आने के बाद अब चुनावी खर्च की पारदर्शिता, संबंधित बिलों और भुगतान की वैधता तथा खर्च की वास्तविकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

₹57.70 लाख का चुनावी खर्च, दस्तावेजों में क्या है?
नगर परिषद की सर्वसाधारण सभा में प्रस्तुत ठराव क्रमांक.11 के अनुसार, वर्ष 2025 के नगर परिषद चुनाव के लिए विभिन्न सामग्रियों और सेवाओं पर खर्च दर्ज किया गया है। दस्तावेज में दिए गए प्रमुख खर्च ऐसा है कि, चुनावी फॉर्म एवं अन्य सामग्री ₹1,89,256., चुनावी फोटोग्राफी एवं वीडियोग्राफी ₹7,50,400., मंडप एवं डेकोरेशन सामग्री ₹18,38,560., CCTV कैमरा किराया एवं संबंधित खर्च ₹4,80,200., चार पहिया वाहनों का किराया ₹6,11,026., चाय एवं नाश्ता ₹5,90,613., मतपत्रिका छपाई ₹3,25,036., अलमारी, कुर्सी एवं टेबल खरीद ₹72,864., कंप्यूटर सामग्री ₹98,771., झेरॉक्स खर्च ₹7,61,450., और बैनर की आपूर्ति ₹51,858., ऐसा कुल दर्ज खर्च ₹57,70,034 है. यह विवरण उपलब्ध दस्तावेज में दर्ज आंकड़ों पर आधारित है। खर्च की वास्तविकता, बिलों की वैधता और भुगतान की पुष्टि संबंधित मूल अभिलेखों की जांच के बाद ही हो सकती है।

85 लाख रुपये के कथित भ्रष्टाचार का आरोप, जांच की मांग
सभापति रोशन परशुराम पचारे द्वारा जिलाधिकारी को भेजे गए पत्र में घुग्घुस नगर परिषद के चुनाव से संबंधित खर्च में कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया है। पत्र में लगभग ₹85 लाख के कथित भ्रष्टाचार का उल्लेख करते हुए संबंधित मामले में जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।
पत्र में यह भी मांग की गई है कि वर्ष 2025-2026 के दौरान नगर परिषद में की गई निविदा प्रक्रिया तथा अन्य संबंधित कार्यों की जांच की जाए। पत्र के अनुसार, नगर परिषद के मुख्याधिकारी के कार्यालय में उपस्थित नहीं रहने के कारण प्रशासनिक कामकाज पर भी सवाल उठाए गए हैं।
हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों को अभी जांच के निष्कर्ष या भ्रष्टाचार सिद्ध होने के प्रमाण के रूप में नहीं माना जा सकता। मामले की वास्तविक स्थिति संबंधित अभिलेखों, भुगतान विवरण और प्रशासनिक जांच से ही स्पष्ट होगी।
सर्वसाधारण सभा में जांच समिति गठित करने का प्रस्ताव
नगर परिषद की सर्वसाधारण सभा के ठराव क्रमांक.11 में चुनावी खर्च का विवरण प्रस्तुत किए जाने का उल्लेख है। दस्तावेज के अनुसार, इस विषय पर चर्चा के बाद चुनावी खर्च की विभागीय जांच कराने, पांच सदस्यों की समिति गठित करने तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर जवाब प्रस्तुत करने का निर्णय दर्ज किया गया है।
यह घटनाक्रम महत्वपूर्ण है, क्योंकि सार्वजनिक धन से किए गए खर्च का हिसाब पारदर्शी होना आवश्यक है। अब यह देखना अहम होगा कि प्रस्ताव के अनुसार समिति वास्तव में गठित होती है या नहीं, जांच कब शुरू होती है और संबंधित रिकॉर्ड की पड़ताल में क्या सामने आता है।

प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल
घुग्घुस नगर परिषद के चुनावी खर्च को लेकर सामने आए इन दस्तावेजों ने सार्वजनिक धन के उपयोग और प्रशासनिक जवाबदेही पर चर्चा तेज कर दी है। एक ओर चुनावी खर्च का विस्तृत ब्यौरा है, तो दूसरी ओर कथित भ्रष्टाचार और निविदा प्रक्रिया की जांच की मांग की गई है।
अब सवाल यह है कि जिलाधिकारी कार्यालय इस शिकायत पर क्या कदम उठाता है? क्या पांच सदस्यीय जांच समिति गठित कर खर्च के प्रत्येक बिल और भुगतान की जांच की जाएगी? और यदि कोई अनियमितता सामने आती है, तो जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होगी?
इन सवालों के जवाब प्रशासनिक जांच और आधिकारिक अभिलेखों से ही सामने आएंगे। फिलहाल, मामले में किसी भी व्यक्ति या ठेकेदार को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। निष्पक्ष जांच, दस्तावेजों का सत्यापन और जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करना ही पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट करने का महत्वपूर्ण रास्ता है।




