Sunday, May 17, 2026

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100% सत्यापन का दावा, लेकिन ज़मीनी हकीकत पर सवाल

घुग्घुस में सुस्त दिख रही SIR मुहिम, क्या तीसरे चरण में पूरी होगी मतदाता जांच?

प्रणयकुमार बंडी

घुग्घुस/चंद्रपुर : भारत निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को “शून्य त्रुटि” बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान (SIR) को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन के अनुसार चंद्रपुर जिले में 100 प्रतिशत मतदाताओं के घर-घर जाकर सत्यापन किया जाएगा, मृत, स्थानांतरित और दोहरे नाम हटाए जाएंगे तथा नए पात्र मतदाताओं का पंजीकरण किया जाएगा। लेकिन ज़मीनी स्तर पर इस अभियान की वास्तविक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

विशेष रूप से घुग्घुस नगर परिषद क्षेत्र में, जहां जनसंख्या 32 हजार से अधिक बताई जाती है, वहां SIR अभियान आधा-अधूरा दिखाई देने की चर्चा जोरों पर है। स्थानीय नागरिकों में यह चर्चा आम हो चुकी है कि कुछ बीएलओ अधिकारी घर-घर जाकर वास्तविक सत्यापन करने के बजाय केवल औपचारिकता निभाते नजर आ रहे हैं। कई स्थानों पर नागरिकों का आरोप है कि अधिकारी फोन पर ही जानकारी लेकर “काम पूरा” दिखाने में व्यस्त हैं।

मतदाता सूची जैसी संवेदनशील प्रक्रिया में यदि प्रत्यक्ष जांच ही नहीं होगी, तो फिर “100 प्रतिशत सत्यापन” का दावा कितना वास्तविक है? यही सवाल अब नागरिक पूछने लगे हैं। क्योंकि मतदाता सूची में त्रुटियां केवल प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था पर सीधा प्रभाव डाल सकती हैं। मृत मतदाताओं के नाम, दोहरी नोंदणी, स्थानांतरित मतदाताओं की एंट्री और नए मतदाताओं के छूटने जैसी समस्याएं वर्षों से चुनाव प्रक्रिया पर सवाल खड़े करती रही हैं।

निर्वाचन आयोग ने इस बार राजनीतिक दलों को भी बूथ लेवल एजेंट (BLA) नियुक्त करने का आवाहन किया है, ताकि प्रक्रिया अधिक पारदर्शी हो सके। लेकिन स्थानीय स्तर पर यह भी सवाल उठ रहा है कि क्या राजनीतिक दबाव और नेताओं की “जी हुजूरी” के बीच वास्तव में निष्पक्ष और कठोर जांच संभव हो पाएगी? या फिर हर बार की तरह कागजों में अभियान सफल दिखाकर फाइलें बंद कर दी जाएंगी?

घुग्घुस क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि यदि तीसरे चरण में भी प्रशासनिक मशीनरी इसी ढीले रवैये से काम करती रही, तो “शून्य त्रुटि मतदाता सूची” का लक्ष्य केवल सरकारी घोषणाओं तक सीमित रह जाएगा। कई लोगों ने मांग की है कि वरिष्ठ अधिकारियों को स्वयं क्षेत्र में उतरकर अचानक निरीक्षण करना चाहिए और निष्क्रिय बीएलओ अधिकारियों की जवाबदेही तय करनी चाहिए।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यही है — क्या तीसरे चरण में SIR अभियान वास्तव में पूर्ण और पारदर्शी तरीके से पूरा होगा? या फिर सरकारी योजनाओं की तरह यह अभियान भी केवल रिपोर्टों और बैठकों तक सीमित रह जाएगा? जनता जवाब चाहती है, क्योंकि मतदाता सूची केवल कागज़ नहीं, लोकतंत्र की नींव होती है।

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